***बेटी के दोहे***

Dr Meenaxi Kaushik

रचनाकार- Dr Meenaxi Kaushik

विधा- दोहे

**बेटी के दोहे*****

1) बांटें खुशी जहान को,बोले मीठे बोल
कन्या फिर क्यूं बोझ है,बोल जिन्दगी बोल।
2) चलती फिरतीलक्ष्मी ,घर आंगन की शान
होती जिस घर बेटियां उसका तीर्थ जहान।
3) बेटे की रख कामना,बेटी मारे बाप
कैसा बेटा दे खुदा,कमा रहा जो पाप।
4) बेटी की हत्या करे,बेटे खातिर बाप
कुलदीपक के नाम पर कैसे कैसे पाप।
5) बेटे खातिर कर रहे जो बेटी का खून
ढूंढे से भी ना मिले, उनको कहीं सूकून।
6) मानव तेरे कर्म को धरा रही धिक्कार
देवी कहता है जिसे,रहा गर्भ मे मार।
7) आया कहां समाज में अब तक भी बदलाव,
मात पिता ही कर रहे कन्या संग दुराव।
8) बेटे से कम आंक कर मत कर देना तू भूल
खुशबू दे जो उम्रभर बेटी ऐसा फूल।
9) पालक भी करने लगे सौतेला व्यवहार
बेटी से ज्यादा करे वो बेटे से प्यार ।
10) नारी पर होनेलगे पग पग अत्याचार
नही सुरक्षित कोख में,शक्तिका अवतार।
11) भूल करी थी कंस ने,कन्या दी थी मार,
केशव ने उस दुष्ट को, दिया मौत उपहार।
12) कन्या की हत्या करे,कहलावे वो कंस,
बेटी को ना मारना,मिट जाएगा वंश।
13)हाथ जोड़ कर 'मीनाक्षी' करती आज गुहार,
कन्या ही तो है यहां,सृष्टि का आधार।
(डा मीनाक्षी कौशिक रोहतक)

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Dr Meenaxi Kaushik
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मांगा नही खुदा से ज्यादा बस इतना चाहती हूँ, करके कर्म कुछ अच्छे सबके दिलों मे रहना चाहती हूँl ईश वन्दना जन सेवा कर जीवन बिताना चाहती हूँ, हर पल हर चेहरे पर मुस्कुराहट लाना चाहती हूँ ||

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