बेटी और बेटे में भेद क्यूँ होता ?

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

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बेटी और बेटे में भेद क्यूँ होता ?
बहुत सोचा पर समझ नहीं आता !
😢😢😢😢😢😢😢
कहते बेटा कुल का वारिश है ,
पर बेटी कौन सी लावारिस है ।
जिस कोख से जन्मता है बेटा ,
बेटी भी तो उसी कोख की पैदाइस है ।।
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बेटी और बेटे में भेद क्यूँ होता ?
बहुत सोचा पर समझ नहीं आता !
😢😢😢😢😢😢😢
कहते बेटा घर में रहेगा ,
बेटी तो पराया धन है ।
कभी सोचा है बेटी को पराया बनाता कौन है ?
बेटे को घर में रहने का हक देता कौन है ?
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बेटी और बेटे में भेद क्यूँ होता ?
बहुत सोचा पर समझ नहीं आता !
😢😢😢😢😢😢😢
बेटा बेटी दो आँखों जैसे , किसी ने बात कही है सच्ची ,
पर दोनों आँखों में से एक आँख क्यूँ लगती नहीं अच्छी ।
बेटे की भ्रूण हत्या करते कभी भी देखा नहीं किसी को ,
जिस भ्रूण को रोज ही मरते देखा वो है केवल बच्ची ।।
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बेटी और बेटे में भेद क्यूँ होता ?
बहुत सोचा पर समझ नहीं आता !
😢😢😢😢😢😢😢

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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