* बेटी अब पिया के द्वार चली*

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- गीत

बाबुल की गलियाँ छोड़ के आज
बेटी अब पिया के द्वार चली
मयके की गली को छोड़ के अब
मेरी लाडली रे ससुराल चली
नाजों नखरों से इसे पाला मैंने
ये छोड़ के मेरा यह धाम चली
बाबुल के हाथ को छोड़ के अब
पिया का वो थामें हाथ चली
बाबुल की गलियाँ छोड़ के आज
बेटी अब पीके द्वार चली

जीवन तेरा फूलों से सजे
काँटो का कभी ना ताज मिले
सिर तेरे सदा ही ताज सजे
तुझे ऐसी प्रीत दुलार मिले
माँ बाप की तुझको ना याद आए ससुराल में लाड और प्यार मिले
माँ बाबा के जैसे मात-पिता
बहन-भाई के जैसे साथी मिलें
बाबुल की ना याद सताए तुझे
पिया घर में खिला संसार मिले
बाबुल की गलियाँ छोड़ के आज
बेटी अब पिया के द्वार चली

****बाबुल की गलियाँ छोड़के आज
बेटी अब पिया के द्वार चली

Views 20
Sponsored
Author
Neeru Mohan
Posts 49
Total Views 1.9k
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia