बेटिय़ों को भी माँ के कोख में बेफिक्र पलने दो।

Satish Verma

रचनाकार- Satish Verma

विधा- कविता

भ्रूण हत्या : कविता ( चतुष्पदी )

मत करो इस धरती को बंजर तुम, तनिक हरीतमा इसके अंचल में रहने दो,
बेटे बेटी का अनुपात ना बिगड़े कभी, नियति को उसके विधान से चलने दो।
बहुत घृणित पाप है, ये भ्रूण हत्या, ये अनर्थ धरा पर तनिक भी नहीं होने दो, ,
पुत्री प्रकृति की एक अनुपम कृति हैं, उसको भी बेखौफ माँ की कोख में पलने दो।

: सतीश वर्मा,
मुम्बई/20.01.2017

Views 240
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Satish Verma
Posts 1
Total Views 240
Supernnauted from management post from Ministry of Defence. Presently, a reputed faculty of Enineering and Management subjects. Writer and Poet : 2 stories and 5 poems books published. Further, one story book and one poem book is under publications.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia