बेटियां

पृथ्वीराज चौहान

रचनाकार- पृथ्वीराज चौहान

विधा- कविता

घर स्वर्ग हो जाता है
जब घर में आती है बेटियां
कण कण सुवासित होता
जब घर में वास कर जाती है बेटियां
रौनक आती खुशहाली आती
जब घर में किलकारती है बेटियां
माँ का हृदय गदगद् होता
मन भाव-विभोर हो जाता है
जब माँ माँ पुकारती है बेटियां
माँ को बड़ा सुकुन है मिलता
जब नन्हे कंधों पर-
बड़ा भार उठाती है बेटियां
पापा की दिनभर की थकान मिट जाती
जब सीने से लग जाती है बेटियां
सर्वजन को प्रेम से जोड़े रखती
घर में चार चांद लगाती है बेटियां
शिक्षा में भी अव्वल रहती
अपनों का मान बढ़ाती है बेटियां
घर हो या कॉलेज हो
फर्ज बखूबी निभाती है बेटियां
मां बाप का कर्ज चुकाने को
बेटा भी बन जाती है बेटियां
इस घर से जब उस घर जाती
अपनी चातुर्य-कौशल से
दो परिवारों को महकाती है बेटियां
संस्कृति और सभ्यता की
खुद पर्याय बन जाती है बेटियां
ऐसी है मेरे देश की बेटियां
ऐसी है मेरे वतन की बेटियां
कवि- पृथ्वीराज चौहान

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पृथ्वीराज चौहान
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पृथ्वीराज चौहान शिक्षा- B.Ed. M.A. ( हिन्दी साहित्य, राजस्थानी) राजस्थानी नेट व्यवसाय- अध्यापक प्रकाशित पुस्तक- राजस्थान री बातां न्यारी (बाल साहित्य राजस्थानीराजस्थानी भाषा में) पता- ग्रामपोस्ट- जानकीदासवाला त. सूरतगढ जिला- श्री गंगानगर (राज.) सम्पर्क- 8003031152

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