बेटियां

जगदीश लववंशी

रचनाकार- जगदीश लववंशी

विधा- कविता

मंदिर मस्जिद टेका माथा,
कर मिन्नतें सबको साधा,
तब…..
एक छोटी सी नन्ही कली,
मेरे घर आँगन में खिली,
लाई संग खुशियां हजार,
जीवन में आयी नई बहार,
वो हैं मन की भोली,
मीठी हैं उसकी बोली,
रहती बनकर सुख की छाया,
बेटी नहीं तो कुछ नहीं पाया,
बेटी हैं धरा का आधार,
करती हैं सपने साकार,
फिर क्यों……………..
सुत की चाहत में सुता को मारते,
सुत सुता में इतना अंतर पालते,
जग को निहारने से पहले ही रौंदते,
एक नन्ही कली को खिलने से रोकते,

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 205
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
जगदीश लववंशी
Posts 29
Total Views 342

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia