बेटियां

अमित चन्द्रवंशी

रचनाकार- अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

विधा- कविता

बेटियां है तो कल हैं…

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"

एक बेटी को जलाकर कोख में मार दिया
गर हो उदास तो बेटी को क्यों मार दिया ?

उस नन्ही सी जान को जीना था
उसे तो अभी दुनिया से लड़ना था।

मेरे देश का कानून कितना शक्तिशाली हैं
पर आज दिखा मुझे कितने अंधेरे में हैं।

एक बेटी को कोख में मार दिया
ससुराल में दहेज के लिए मार दिये।

सुनसान सड़क में अकेले नही चलने नही देते
गर जिन्दा होती तो गुंडे कुचल देते।

बेटियां आज पथ में सुरक्षित नही हैं
कैसे कहे हमारा  देश सुरक्षित हैं ?

बेटियां तो आज और कल हैं
सदियों से उनकी पुजा होती हैं
ये भारत 'अमित' नारी पूज्य हैं
कैसे हाल हो रहा है इस देश का??

प्रश्न मन में लिए घूमता हु
ये कैसा भारत बन गया है 'अमित'
बेटिया रोड में तो क्या कोख में सुरक्षित नही हैं

इस देश की पावन भूमि में
इतिहास अमर है बेटियों के नाम
चमक है बेटी इस देश की।

-अमित चन्द्रवंशी "सुपा"
उम्र-17वर्ष रामनगर कवर्धा
छत्तीसगढ़
मो.-8085686829

Sponsored
Views 120
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
अमित चन्द्रवंशी
Posts 1
Total Views 120
मैं 12वी पास 17वर्ष का हु। कभी न खत्म ये तो मेरा नाम है और चाहत भी है endless बने का, पहचान मेरा मंजिल नही है मंजिल मेरी जीत का हैं।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia