बेटियां

सौम्या मिश्रा अनुश्री

रचनाकार- सौम्या मिश्रा अनुश्री

विधा- अन्य

नील छंद

विधान ~ भगण×5 + गुरु

शील विनीत समाहित सुन्दर सोहक है।
रूपवती बिटिया अतिपावन मोहक है।।
शारद सीय इला हर रूप मनोहर है।
है जगती बिटिया अनमोल धरोहर है।।

रूपहि सौम्य सुता अति निर्मल पावन है।
शोभित ही करती बिटिया घर आँगन है।।
भाग्य जगें बिटिया जब जन्म धरा पर हो।
निर्भय श्रेष्ठ बने बिटिया मति तत्पर हो।।

सौम्य मिश्रा अनुश्री

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सौम्या मिश्रा अनुश्री
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धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी बढ़ें, करने को शब्द गुंजन। कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ, कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें, करने साहित्य में हवन। सुगमित अमिय हुआ सवेरा , छटेगा तम जो था घनेरा, अब बनेगा उत्कृष्ट चमन। सबका साथ सबका विकास, दृढ़ निश्चयी होवे विश्वास, महके ये सारा उपवन। धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। सौम्या मिश्रा अनुश्री

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