बेटियां

Santosh Nema

रचनाकार- Santosh Nema

विधा- कविता

मेरी गुड़िया मेरी बिटिया मेरी अनमोल रतन
तू ही तो शुकुं मेरा है तुझसे दुखों का समन

तू ही दो कुलों की रखती है लाज निभाती भी
तुझसे रोशन है हमारे घर का महकता चमन

हमारी आशा हमारे सपने तू ही हमारा भविष्य
तुझसे ही तो चहकता ये है अपने घर का अंगन

तेरी खुशियाँ, तेरे सपने,तेरे ख्वाब पुरे हों सभी
तू जो हंसती है तो हंसता है यह सारा गगन

तू ही लक्ष्मी,तू ही दुर्गा,तू ही सीता,मीरा भी तू
बेटी तू ही देवी का रूप तू ही है सुख का सदन

बिन तेरे परिवार अधूरा सूना तुझ बिन जीवन
नांदा हैं जो लिंग परीक्षण का करते हैं चयन

पंख अरमानों के लगें भरे तू सदा ऊँची उड़ान
तेरी खुशियों से ही तो दमकते हैं मेरे नयन

जीवन में सदा आये बहार,हों खुशियाँ अपार
रहे"संतोष" बहे सरिता सा सदा पावन अमन

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Santosh Nema
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