बेटियां

Manoj Gupta

रचनाकार- Manoj Gupta

विधा- कविता

पायल की रुनझुन में तितली की गुनगुन में
छत की मुंडेरों पे और घर के आँगन में
हँसती खिलखिलाती नज़र आती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में लाती है बेटियां
है जगह कौन वो जहां पर बेटी नही है
किसी से भी कद में वह हेटी नही है
कदम कदम उन्नति के शिखर चढ़ रही
स्वयं के नित प्रयासों से आगे बढ़ रही
अहसास अपने होंनें का करवा रही है वो
एवरेस्ट पर भी झंडा फहरा रही है वो
छू रही वह आसमां कर हौंसला बुलंद
विमान भी गगन में उड़ाती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
बेटों की चाहत एक अच्छा ख्याल है
बेटी के जन्म से क्यूँ होता मलाल है ?
ऐसा बने समाज जहां बेटी विधान हो
घर का सारा कानून हो और संविधान हो
पिता की चिता को आग बेटी भी दे सके
परिवार के सुख दुःख का हक़ बेटी भी ले सके
माँ बहन का दुलार बाँट लेती है वह अगर
तो दुर्गा सा रौद्र रूप भी दिखाती हैं बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
दहेज़ का दानव भी अब बेटी मिटाएगी
समाज को सच्चाई का आइना दिखाएगी
बनकर सूरज अँधेरे को हटानें की शक्ति है
कहीं सत्यवान के लिए सावित्री की भक्ति है
सीता है, द्रोपदी है तो कही मीरा की पीर है
कहीं प्रेम पर मरनेँ वाली रांझे की हीर है
थैचर सी, इंदिरा सी और भंडारानायके सी बन
सारे जगत पर राज़ चलाती है बेटियां
खुशहाली ज़िन्दगी में …………………….
मनोज

Sponsored
Views 25
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Manoj Gupta
Posts 1
Total Views 25

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia