बेटियां

shalinee dubey

रचनाकार- shalinee dubey

विधा- कविता

कहते है दो कुलों को
जोड़ती है बेटियां
मुश्किलो को अक्सर
तोड़ती है बेटियां।

त्याग और समर्पण की
मूर्ति होती है बेटियां
मायका और ससुराल को
प्रेम से सींचती है बेटियां।

फिर बेटी से बहु के सफर में
क्यों भेदभाव सहती है बेटियां
ख्वाबों को अपने क्यों
आंखियों के नीर से धोती है बेटियां।
———-
#स्वरचित मौलिक
शालिनीपंकज दुबे

Views 302
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
shalinee dubey
Posts 1
Total Views 302
नाम-शालिनीपंकज दुबे शिक्षा-एमएससी-प्राणिशास्त्र,ऍम ए-समाजशास्त्र,डीएड व्यवसाय-शिक्षिका पढ़ना तो आज भी बहुत पसंद ,आर्टिकल लिखना स्कूल के समय से दैनिक भास्कर में ,निबंध इत्यादि पर कविता तो पहली बार लिखी जीवनसाथी के लिए सिर्फ शुद्ध मन के भाव थे प्रेम, शिकायत,उम्मीदे,और उनका जीवन में आना ही मेरी कविता की शुरुआत थी और आज उन्ही की प्रेरणा की प्रतिपल लक्षय को समर्पित हूँ। आगे यही प्रयास

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia