बेटियां हैं तो आँगन है…

आनंद बिहारी

रचनाकार- आनंद बिहारी

विधा- कविता

बेटियां हैं तो ये आँगन है, बेटियां हैं तो घर है
बेटियां जग में ना हों, तो कौन नहीं बेघर है।1।

मेरी बेटी, तेरी बेटी, सबकी बेटियां इक जैसी
बेटियों के बिना सूना,… ये संसार – शहर है।2।

बेटियां झड़ने की झड़-2, वीणा के मधु स्वर हैं
बेटियों से सरस जीवन, जीवन अजर-अमर है।3।

बेटियों के पौध को सींचो प्यार-दुलार के जल से
शिक्षा दो-क़ाबिल बनें, चाहत उनके अंदर है।4।

जिनके जीवन में बेटी-बहन, ना कोई नारी है
उनका जीवन मधुमास में उजड़ है, पतझड़ है।5।

©आनंद बिहारी, चंडीगढ़

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आनंद बिहारी
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गीत-ग़ज़लकार by Passion नाम: आनंद कुमार तिवारी सम्मान: विश्व हिंदी रचनाकार मंच से "काव्यश्री" सम्मान जन्म: 10 जुलाई 1976 को सारण (अब सिवान), बिहार में शिक्षा: B A (Hons), CAIIB (Financial Advising) लेखन विधा: गीत-गज़लें, Creative Writing etc प्रकाशन: रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित FB/Tweeter Page: @anandbiharilive Whatsapp: 9878115857

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