” बेटियां “………….

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- कविता

" बेटियाँ "
————
ये पूछो मत मुझसे क्या होती है बेटी
न शब्द न परिभाषा में बंधती है बेटी।
*
चिड़िया नहीं, ममता से भरी मानव है
हँसते हुए बहुत कुछ सहती है बेटी ।
*
सबको अपना समझती,कहाये 'परायी'
परिवार से बहुत लगाव रखती है बेटी ।
*
खुद दु:ख सहकर भी खुशी देती है
अपने दर्द बयां कम करती है बेटी ।
*
दूर रहकर भी दिल में रखती सबको
स्नेह भरा दिल,पर भावुक होती है बेटी।
*
भावुक कर देती , जाती जब ससुराल
दो कुल को आपस में जोड़ती है बेटी ।
*
दर्जा बराबरी का दंभ भरता समाज पर
घर में भी इससे वंचित रहती है बेटी।
*
कटु सत्य,आज भी कम खुशी होती
'मन में' घर में जब जन्म लेती है बेटी।
*
" काश, बेटी न होकर होती मैं भी बेटा "
इसी विडंबना से घायल सोचती है बेटी ।
*
शब्द कम हैं, कहूं 'बेटियों' के बारे में
साहस अदम्य फिर भी सहमती है बेटी।
*
गर सुविधा मिले आगे बढ़ने की "पूनम"
तो हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है बेटी
स्वरचित:-पूनम झा।कोटा,राजस्थान
###################

Views 336
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
पूनम झा
Posts 60
Total Views 1.2k
मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia