बेटियाँ

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

पास रहती हमेशा नहीं बेटियाँ
पर न माँ बाप को भूलतीं बेटियाँ

कहते बेटों को अपना सहारा मगर
दिल के गम अपने सँग बाँटतीं बेटियाँ

पाँव इनके जरा सी धरा क्या मिली
हौसलों से गगन छू रहीं बेटियाँ

आत्मसम्मान अपना यहाँ चाहतीं
इसलिये आत्मनिर्भर हुईं बेटियां

नाम माँ बाप का ये भी ऊँचा करें
बेटों से अब नहीं कम कहीं बेटियाँ

सोचने अब लगी 'अर्चना' सोच भी
रीत ऐसे बदलने लगीं बेटियाँ

डॉ अर्चना गुप्ता

Sponsored
Views 40
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 264
Total Views 19.5k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia