बेटियाँ

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- मुक्तक

सुताओं में माँतु-अॉचल, दिखे पति की पूर्णिमा|
पिता की हर भावना का ख्याल, बनकर सूरमा|
अहं को क्षर,बंध हर लें, प्रीतिमय आधार बन |
लड़कियां जीवन-प्रदाता,भाव की गुरुपूर्णिमा|

इसलिए बेटी पढा लो,औ लिखो सुख-जीवनी|
सजगता का भानु इनमें, प्रीत की संजीवनी
लड़कियां घर में रहेंगीं, सफल जीवन आपका
बचालो इनको सुजन ,तब मिले हँसती-जीवनी|

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
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