बेटियाँ

Tejvir Singh

रचनाकार- Tejvir Singh

विधा- कविता

बेटा यदि घर-बार है,तो संसार बेटियाँ।
मानव जनम में ईश का अवतार बेटियाँ।
माता-पिता के प्यार का है सार बेटियाँ।
वसुधा पे सीधा मोक्ष का हैं द्वार बेटियाँ।

बेटा 'शगुन' तो खुशियों का त्यौहार बेटियाँ।
मानव पे हुआ ईश् का उपकार बेटियाँ।
राम-ओ-रहीम,वाहे गुरु बुद्ध समझिये।
दुनियाँ के हर एक धर्म का हैं सार बेटियाँ।

रिश्तों की प्रीत ,नेह की मनुहार बेटियाँ।
खुशियों भरा है राखी का त्यौहार बेटियाँ।
धरती गगन सा मेल इन्हें नेह दीजिए।
बेटा है गर समाज तो व्यवहार बेटियाँ।

ऋषियों का "तेज",धर्म-सदाचार बेटियाँ।
संचित कर्म का पुण्य है,सत्कार बेटियाँ।
मानव जनम में रूप,शील,गुण की श्रेष्ठता।
कलयुग में रामराज का संस्कार बेटियाँ।

माता-पिता के स्वप्न हैं,साकार बेटियाँ।
विपदा में हरें कष्ट ही हर बार बेटियाँ।
दीनों को दीनानाथ हैं,असुरों को चण्डिका।
दुष्टों का करें क्षण में ही संहार बेटियाँ।
***************************

Views 26
Sponsored
Author
Tejvir Singh
Posts 27
Total Views 158
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia