बेटियाँ

प्रदीप तिवारी 'धवल'

रचनाकार- प्रदीप तिवारी 'धवल'

विधा- गीत

बेटियाँ

हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ
कर रही हैं राष्ट्र का निर्मान बेटियाँ
प्रकृति प्रदत्त प्रेम की संतान बेटियाँ
प्रभू ने खुद रचा हो जो बखान बेटियाँ

पुरुषों के सारे काज सहजता से जो कर दे
बुझते चरागे लौ को जो आशाओं से भर दे
नारी स्वरुप में मिली भगवान बेटियाँ
साहित्य, शिक्षा, स्वास्थ्य का संधान बेटियाँ
तकनीक औ विज्ञान में प्रतिमान बेटियाँ

रेल, वायु, सड़क मार्ग तलवों के नीचे
प्रत्येक क्षेत्र में किया लड़कों को है पीछे
सौभाग्यशाली पाते हैं वरदान बेटियाँ
किसी भी क्षेत्र से नहीं अनजान बेटियाँ
मैके में अब नहीं रही मेहमान बेटियाँ

कोख में ही मारने वालों ज़रा सोचो
पाओगे कैसे तुम बहू इस कृत्य को रोको
कुल को बढ़ा सके जो वो सम्मान बेटियाँ
शो पीस अबला सी नहीं सामान बेटियाँ
अब बाप के लिए नहीं अपमान बेटियाँ

करुना, ममत्व, क्षमा, प्रेम, दया, धर्म, दान
विरले पुरुष ही पाते हैं ऐसे गुणों का मान
सम्पूर्ण विश्व में गुणों की खान बेटियाँ
दहेज़ की दुकान का ब्यवधान बेटियाँ
खेलों में सुनाती हैं राष्ट्र गान बेटियाँ

हर कोख कौम देश का अभिमान बेटियाँ
कर रही हैं राष्ट्र का निर्मान बेटियाँ

प्रदीप तिवारी ‘धवल’

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 887
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
प्रदीप तिवारी 'धवल'
Posts 19
Total Views 8.1k
मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia