बेटियाँ

डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

रचनाकार- डा. सूर्यनारायण पाण्डेय

विधा- कविता

बेटियाँ,बेटियाँ हैं
जो हैं सूत्रधार
सृजन की,ममत्व की-
और वैश्विक सौन्दर्य की ।
संभव नहीं
इनके बिना-
सृष्टि का अस्तित्व
और यहाँ तक-
'परिवार'की पूर्णता।
कितना अधूरा लगता है,
बेटियों के बिना
एक पिता का व्यक्तित्व,
'माँ' का अधूरापन।
बेटियाँ
प्रकृति की अद्भुत सृजन हैं
जो बनाती हैं
एक परिवार, एक गांव और एक शहर भी
और फिर एक देश
और अंततः एक अद्भुत संसार।
वह माँ हैं, बहन हैं,प्रेयसी
और अर्धांगिनी भी,
वह नवदुर्गा हैं
और सहनशीलता के शीर्ष पर
प्रतिष्ठित
राम की सीता भी ।

Sponsored
Views 347
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
Posts 30
Total Views 1.8k
देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 1000 से अधिक लेख, कहानियां, व्यंग्य, कविताएं आदि प्रकाशित। 'कर्फ्यू में शहर' काव्य संग्रह मित्र प्रकाशन, कोलकाता के सहयोग से प्रकाशित। सामान्य ज्ञान दिग्दर्शन, दिल्ली : सम्पूर्ण अध्ययन, वेस्ट बंगाल : एट ए ग्लांस जैसी बहुचर्चित कृतियां 'उपकार प्रकाशन' से प्रकाशित। प्रत्येक चार माह पर समसामयिक सीरीज का लगातार प्रकाशन, 'अंचल भारती' पत्रिका का सह-सम्पादन ।मो9450017326

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia