****बेटियाँ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

04.01.17 **बेटियाँ** सांय 6.48
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बेटियाँ बाबुल के बगीचे की शान होती हैं
बेटियाँ …बाबुल की बुलबुल .. .और
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माँ ..के दिल का अरमान होती है
उसकी चहचहाट घर आंगन खेत –
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खलियान में …लाती है रौनक
बेटियाँ …बिन मांगी मुराद होती हैं
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बेटों से…..लाख होशियार.. होती है
बेटियाँ…. बाबुल की जान होती है
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फिर …………………भी
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अपने ……ही …..घर …..में
दो ..दिन की ..मेंहमान….होती है
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बेटियाँ..माँ के दिल का अरमान होती हैं
बेटियाँ माँ के दिल की फरियाद होती है
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बेटियों से ग़म की राह आसान होती है
बेटियाँ…खुशियों का पैगाम होती हैं
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बेटियों से ही चलता घर और वर
बेटियों से ही यह संसार चलता है
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बेटियों से ही यह संसार चलता है।।
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👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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