बेटियाँ

गौरव पाण्डेय

रचनाकार- गौरव पाण्डेय

विधा- गज़ल/गीतिका

व्यक्ति के निर्माण का आधार अपनी बेटियाँ।
स्नेह,ममता,त्याग का संसार अपनी बेटियाँ।।

फूल सा कोमल हृदय रखती यक़ीनन है मगर।
आन की हो बात तो तलवार अपनी बेटियाँ।।

हर मुसीबत में सहारा बनती हैं माँ बाप का।
मत कभी समझो यहाँ लाचार अपनी बेटियाँ।।

बात दिल की हो तो जां देती हैं ये हँसते हुए।
दुश्मनी पे हो तो हैं ललकार अपनी बेटियाँ।।

हो कला,विज्ञान,संस्कृति या कोई भी क्षेत्र अब।
जीत की भरती सदा हुंकार अपनी बेटियाँ।।

इक क़दम दहलीज में तो इक कदम है चाँद पे।
यूँ सफ़लता की हुईं रफ़्तार अपनी बेटियाँ।।

माँ कभी , पत्नी कभी या फिर बहन के रूप में।
वारती हैं हर ख़ुशी सौ बार अपनी बेटियाँ।।

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