बेटियाँ

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- गज़ल/गीतिका

#बेटियाँ / दिनेश एल० "जैहिंद"

( १ )
बसी है इनमें मानव जन्म की कुंडलियाँ |
छुपी हैं आदि से अंत तक की कहानियाँ |
होती हैं हमारी बेटियाँ हमारे परिवार में,,
लक्ष्मी, गौरी, माँ शारदे के समान देवियाँ ||
( २ )
किसी बेटे से कम नहीं हैं हमारी बेटियाँ |
हमारे बूढ़ापे की लाठी हैं दुलारी बेटियाँ |
आख़िर क्यों आँगन में खिलने से पहले,,
हम उनपे बेझिझक चलाते हैं यूँ आरियाँ ||

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दिनेश एल०
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मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

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