*** बेटियाँ ***

Raju Gajbhiye

रचनाकार- Raju Gajbhiye

विधा- कविता

*** *** बेटियाँ ******

बेटियाँ घर , आँगन का फूल है
खुशिया देना उसका उसूल है

बेटियाँ का खर्च ना फिजूल है
बेटियाँ की हर दुआ कबूल है

हर क्षेत्र में आगे बेटियाँ
तोड़ती समाज की बेड़िया

बेटियाँ को नाराज करना इंसान तेरी भूल है
बेटियाँ के कदम धरती पर पड़ते ही श्री,लक्ष्मी है

– राजू गजभिये
बदनावर जिला धार ( मध्य प्रदेश )

Sponsored
Views 57
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Raju Gajbhiye
Posts 19
Total Views 417
परिचय - मैं राजू गजभिये , मूलतः यवतमाल ( महाराष्ट्र) मातृभाषा मराठी , वर्तमान में बदनावर जिला धार (मध्य प्रदेश ) कश्यप स्वीटनर्स लिमिटेड में कार्यरत | किताबे पढना एव लेखन | अपितु लिखने का शौक है | व्यग , लेख , कहानी , कविताये , लघुकथा और सामाजिक मुद्दों पर भी लेखन | विज्ञानं साहित्य आदि पर निरंतरता लिखने की कोशिश जारी है | समय-समय पर प्रतिष्टित समाचार - पत्रो , पत्रिकाओ में प्रकाशित होती रहती

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia