बेटियाँ हैं नसीब

ब्रजेश शर्मा

रचनाकार- ब्रजेश शर्मा "विफल"

विधा- गीत

🌹🌹बेटियाँ🌹🌹

बेटियाँ हैं नसीब बेटियाँ प्रीत हैं,
ये अयाचित ख़ुशी हर कहीं जीत हैं ।।

बेटा पैदा हुआ तो बधाई हुई,
बेटी पैदा हुई जग हँसाई हुई ,
अपनी होके भीे क्यूँ ये पराई हुई
जाने कैसी जगत की उलट रीत हैं ।।
ये अयाचित ख़ुशी हर…..

जिसने भेजा हमें सबको वो पालता,
बोझ इनको मग़र क्यूँ जगत मानता??
पैदा होने से पहले ही क्यूँ मारता??
बेटियाँ ख्वाबों जैसी मन चीत हैं ।।
ये अयचित ख़ुशी हर …..

इनके होने से ही घर;घर सा लगे ,
जिसके घर बेटियाँ भाग उसके जगे,
बोलती हैं सदा बोल मिश्री पगे,
मन को दे जो सुकूँ ये वही गीत हैं ।।
बेटियाँ हैं नसीब ….

ये विधाता के हाथों की पहचान सी,
जो मुकम्मल हुए उसके अरमान सी,
बेटियाँ आस्था के ही सौपान सी ,
बेटियाँ दर्द में कोई मनमीत हैं ।।
ये अयाचित ख़ुशी हर कहीं जीत हैं ।।

बहते धारों सी हैं कुछ किनारों सी हैं,
ये हैं सूरज नए कुछ बहारों सी हैं,
चाँद सी बेटियाँ अब कटारों सी हैं,
बेटियाँ आग होकर भी संगीत हैं ।।
ये अयाचित ख़ुशी हर कहीं जीत हैं।।

ब्रजेश शर्मा *विफ़ल*
झाँसी

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ब्रजेश शर्मा
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मैं ब्रजेश शर्मा झाँसी से , रेलवे में टिकिट चेकिंग में बतौर उप मुख्य टिकिट निरीक्षक पदस्थ हूँ ।। मन के भाव शब्दों में उतारने का प्रयास करता हूँ ,ज़िंदगी अपने हर रूप में हर रंग में लुभाती है क्योंकि घनघोर आशा वादी हूँ। जीने का फ़लसफ़ा थोड़ा जुदा सा है ।। देखता हूँ मैं ज़र्रे ज़र्रे में ख़ुदा, मेरा बाग़बान ए अज़ल पत्थरों तक महदूद नही ।। @विफल
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