बेचैन मच्छर ।

Satyendra kumar Upadhyay

रचनाकार- Satyendra kumar Upadhyay

विधा- लघु कथा

कहाँ गया ? कहाँ ग..या ? सारे मच्छर कमरे में रात भर उसे ढ़ूँढ-2 थकहार सुबह होते ही कोनों जा छुपे अँधेरों की गोद में समा गये थे । वहीं शुचि ने उनके छुपने पर मच्छरदानी रूपी मर्दानी धोती आधी कर , जो रात्रि भर ओढ रखी थी ! वह उसे लपेट , चलता बन ही रहा था कि तभी उसके फोन की घंटी बजी कि रात्रि डेढ़ बजे क्या हुआ था ?
वह हक्का-बक्का बना बोला " कुछ भी नहीं ! तो जबाब मिला कि ठीक बारह बजे हेडक्वार्टर पर अपने मातहतों के संग मिलो ।
वह सोच ही रहा कि लघु मिला पर वह भी सो गया था अतः वह भी कुछ नहीं बता पाया । सभी गये और तीन को तो सस्पेंड कर दिया गया था और मच्छरों को चकमा देने वाले शुचि को मात्र चार्जशीट ।
असलियत तो यह थी रात्रि ड्यूटी में शुचि ने यह फार्मूला बना रखा था कि तुम भी सोओ और मुझे भी डिस्टर्ब न करो ।और आज डेढ़ बजे एक हादसा हो गया और सोने के कारण किसी को भनक तक न लगी और बात मीडिया में चली गयी थी ।
लेकिन सारे मच्छर आज बेहद खुश थे क्योंकि शुचि बिना मर्दाना धोती के जागकर ड्यूटी कर रहा था । टुटपुँजिया नेता जो बन बैठा था और सस्पेंड होने से बच गया और उसकी टीम दिन में आ गयी थी ।

Views 8
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Satyendra kumar Upadhyay
Posts 13
Total Views 51
short story writer.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia