बुरा न मानो होली है। (हाईकू)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- हाइकु

बुरा न मानो होली है। (होली की हाईकू। 5-7-5

बुरा न मानो
होली है जी होली हैं
रंग उड़ाओ।

रंग उड़ाओ
शिकवे भूलकर
खुशी मनाओं।

खुशी मनाओं
सारे मिलकर
नाचों नचाओं।

नाचों नचाओं
रंगों की होली खेलों
पानी बचाओं।

पानी बचाओं
मदिरा छोड़कर
चाय पिलाओं।

चाय पिलाओं
कड़वाहट छोड़ो
मीठा खिलाओ।

मीठा खिलाओं
दीपक जलाकर
तम भगाओ।

तम भगाओ
सभी साथ मिलके
होली मनाओं।

रामप्रसाद लिल्हारे
"मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

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