*बुरा न बोलो बोल रे*

आनन्द विश्वास

रचनाकार- आनन्द विश्वास

विधा- कविता

*बुरा न बोलो बोल रे*
…आनन्द विश्वास

बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे,
वाणी में मिसरी तो घोलो, बोल-बोल को तोल रे।
मानव मर जाता है लेकिन,
शब्द कभी ना मरता है।
शब्द-बाण से आहत मन का,
घाव कभी ना भरता है।
सौ-सौ बार सोच कर बोलो, बात यही अनमोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
पांचाली के शब्द-बाण से,
कुरूक्षेत्र रंग लाल हुआ।
जंगल-जंगल भटके पांडव,
चीरहरण, क्या हाल हुआ।
बोल सको तो अच्छा बोलो, वर्ना मुँह मत खोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
जो देखोगे और सुनोगे,
वैसा ही मन हो जायेगा।
अच्छी बातें, अच्छा दर्शन,
जीवन निर्मल हो जायेगा।
अच्छा मन, सबसे अच्छा धन, मनवा जरा टटोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
कोयल बोले मीठी वाणी,
कानों में रस घोले है।
पिहु-पिहु मन मोर नाचता,
सबके मन को मोहे है।
खट्टी अमियाँ खाकर मिट्ठू, मीठा-मीठा बोल रे।
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
*****
…आनन्द विश्वास

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आनन्द विश्वास
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आनन्द विश्वास जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद अध्यापन- अहमदाबाद और अब- स्वतंत्र लेखन (दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) *मिटने वाली रात नहीं*, *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) *बहादुर बेटी*(बाल-उपन्यास), *मेरे पापा सबसे अच्छे* (बाल-गीत)। पताः :सी/85 ईस्ट एण्ड एपार्टमेन्ट्स, मयूर विहार फेज़-1 नई दिल्ली-110096 मो. न. - 9898529244, 7042859040 ई-मेलः anandvishvas@gmail.com **

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