*** बुधवारी त्योंहार ****

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

मुफ़्त में कोई
बांटता नही
मुहब्बत के लड्डू
ये कोई बुधवारी
त्योंहार नही है
जो गणेश जी
के भोग लगाया
और
सिजदा करके
बडी आसानी से
खा …….लिया
अगर खा भी लो
तो आसानी से
पचता कहाँ है
हो ना हो जिस
आदमी …….को
किसी ……….से
प्यार हो जाये
वो बचता कहाँ है
ना घर का
रहता …………है
और ना घाट का
क्या अब ..भी
तैयार ………हो
खाने ………..को
मुहब्बत का लड्डू
तो ………हमारी
….शुभकामनाऐ
आपके साथ है ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

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