बुढापा

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- अन्य

🌹🌹🌹🌹
🌺बुढापा 🌺

🌺आया जीवन संध्या
कांटे भरी बगिया
दूर सभी खुशियाँ 🌺1

🌺बुढापे की माया
कितना रोग लाया
दर्द भरी काया 🌺2

🌺बड़ा कठिन घड़ी
कमर झूकी
हाथ में छड़ी 🌺3

🌺बुढापे का कहर
कमजोर नजर
दवा भी बेअसर 🌺4

🌺जब आता बुढापा
चेहरे पर गहरी छाया
माथे पर हिमाला 🌺5

🌺चेहरे पर झुर्रियां
अकेलेपन की दुनिया
कितनी मजबूरियां 🌺6
–लक्ष्मी सिंह 💓☺

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

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