बुढापा एक अभिशाप

Bijender Gemini

रचनाकार- Bijender Gemini

विधा- लघु कथा

लघुकथा

बुढापा एक अभिशाप

– बीजेन्द्र जैमिनी

मुझे अपने गाँव की याद आई थी । मैनें जल्दी-जल्दी कार्यालय का काम समाप्त कर के मोटर साईकिल से गाँव की ओर चल दिया –
एक वृद्वा सड़क के किनारे बैठा-बैठा ही आटों वालो को आवाज देकर , रोकने का प्रयास कर रहा था । परन्तु आटों वाले वृद्वा होने के कारण अपने आटों में नहीं बैठा रहे थे । मैनें वृद्वा के पास जा कर पूछा- आप ने कहाँ जाना है ? तभी मेरी नंजर वृद्वा के ऊपर गर्इ तो क्या देखा – यह तो गाँव के स्कूल का हैडमास्टर हुआ करते थे । मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि इस रोड़ पर चलने वाले अधिकतर आटों वाले इन्ही से पढ़ा करते थे । इन को आटों में बैठना तो दूर , इन को आदर तक नहीं देते है । मैनें हैडमास्टर को अपनी मोटर साईकिल पर बैठा कर गाँव ले गया । मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है बस !एक बात ही समझ आती है कि बुढापा एक अभिशाप है । ##

Views 118
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Bijender Gemini
Posts 28
Total Views 750
कवि, लेखक, पत्रकार, समीक्षक पताः हिन्दी भवन, 554-सी, सैक्टर-6, पानीपत-132103, हरियाणा, भारत मो.919355003609

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia