बिन माँ कुछ कल्पना नहीं

दुष्यंत कुमार पटेल

रचनाकार- दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

विधा- कविता

इस सृष्टि में भगवान है
माँ के रूप में विघमान है
बिन माँ कुछ कल्पना नहीं
माँ है तो सारा जहान है

जो हर लेती हर दुःख को
माँ अलैकिक शक्ति रूप है
हर पहर करू आरती श्रद्धा से
माँ भगवान की स्वरुप है

हँसके गलतियाँ करती है माँफ
माँ करुणा-दया का सागर है
जहाँ जीवन की शुरुवात होती है
माँ वो पहली ऐसी डगर है

उजाला देने वाली माँ चंद्रसूर्य है
माँ की महिमा जग में अपार है
माँ हमें चरणों में रखना सदा
माँ तू ही ज़िन्दगी की आधार है

तुम्हारी प्रेरणा में हर जीत है,
माँ तू ही भविष्य तू ही अतीत है
माँ तुम्हें पाके “दुष्यंत” पुलकित है
माँ सारा जीवन तुमपे समर्पित है

Sponsored
Views 35
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
दुष्यंत कुमार पटेल
Posts 100
Total Views 6.9k
नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
2 comments