बिन बात की बातों-बातों में बातों से रुलाये जाते हैं।

Wasiph Ansary

रचनाकार- Wasiph Ansary

विधा- गज़ल/गीतिका

बिन बात की बातों-बातों में बातों से रुलाये जाते हैं ।
दीपक तो यहां जलते ही नहीं बस दिल को जलाये जाते हैं।।
ये अब्र कहां तक फैली है ये घटा कहां तक बरसेगी।
इस बात की कोई खबर नहीं क्यों छतरी लगाये जाते हैं।।
गर हिन्दू-मुस्लिम मिल के रहें तो हिन्द सलामत हो जाये।
इन पण्डित,मौलवी-मुल्लों से हम तो घबराये जाते हैं।।
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे हैं जो धर्म के ठेके लेते हैं।
मन को तो कभी धोते ही नहीं हर रोज नहाये जाते हैं।।
ये मन्दिर-मस्जिद काहे को है जब प्रेम नहीं तो कछ भी नहीं।
क्यों अजां पुकारी जाती है क्यों घण्टे बजाये जाते हैं।।
तेरा भी लहू तो लाल ही है मेरा भी लहू तो लाल ही है।
क्यों जात-धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाये जाते हैं।।

Sponsored
Views 11
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Wasiph Ansary
Posts 4
Total Views 54

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia