बिटिया

डॉ.सुरेन्द्र शर्मा

रचनाकार- डॉ.सुरेन्द्र शर्मा

विधा- कविता

बिटिया

जब से तू आई है बिटिया
जीवन में मेरे बहार छाई है
सिर्फ बिटिया नहीं है तू
मेरे जीवन की परछाई है।

जीवन में तुम मिली मुझे
ईश्वर की अनमोल सौगात हो तुम
मुझे जिंदगी जीने का मिला
एक अर्थपूर्ण बहाना हो तुम।

मेरे चेहरे पर जो खिले
वो प्यारी मुस्कान हो तुम
तेरे चेहरे को देख खिले उठे
मेरे जीवन की वो बगिया हो तुम।

तुझ से मिली मुझे प्रेरणा
जब हर पल मुस्काती हो तुम
मिलती मुझको नई ऊर्जा
खिल-खिलाकर मुझे जब मिलती हो तुम।

फलो-फूलो तुम अमर बेल सी
सदा नेक राह पर चलो तुम
धन धान्य से परिपूर्ण रहे जीवन तुम्हारा
आसमान की ऊंचाइयों को छुओ तुम।

दिल से निकले यही दुआ बस
हर पल सदा खुश रहो तुम
जब-जब भी मिलें ये जीवन मुझे
हर जन्म मिलें बिटिया बन तुम।

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