बिछड़ी हुई गली

Santosh Barmaiya

रचनाकार- Santosh Barmaiya

विधा- गज़ल/गीतिका

बिछड़ी हुई गलियों में बीती कहानी देखी।
जगह-जगह में यादों की छिपी निशानी देखी।।

परत हट गई है, धुंध भी आँखों की हटी अब।
गुजरा गली तो बचपन की जिंदगानी देखी।।

तस्वीर छपी अखबार के वो आए शहर में ,
यारों के हाथों…वो तस्वीर.. पुरानी देखी।।

वो चूम के माथा, धोए पग आँख-पानी से।
पलकों में बिठाकर पूजते महमानी देखी।।

कदम-कदम में चाहत की बारिश से भींगे हम,
झूमती, मदमस्त, अल्हड़ सी….दीवानी देखी।।

वो बरसों के गुजरे पल मानो कल की बातें,
टोली में यारों की…… मस्ती ..रूहानी देखी।।

बाग-बाग हुआ दिल, पाँव जमीं पे न थमते अब,
यारों को बीते पल……..याद मुँह-जबानी देखी।।

लगा गले से रो लिये , ..कुछ नाराज दिल ने भी,
कह , दूर रहना …अपनों से …..बेइमानी देखी।।

ना भूलते "जय" अपनों को, ….जो दूर रहते है।
आँखों में पानी सबके …..मिल.. नादानी देखी।।

संतोष बरमैया "जय"

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Santosh Barmaiya
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मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया,ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, बी.ऐड,।अध्यापक पद पर कार्यरत हूँ। मेरी रचनाएँ पूर्व में देशबन्धु, एक्स प्रेस,संवाद कुंज, अख़बार तथा पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे नवभारत अखबार में प्रकाशित होती रहती है। मेरी कलम अधिकांश समय प्रेरणा गीत तथा गजल लिखती है। मेरी पसंदीदा रचना "जवानी" l

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