बाल चुभे तो पत्नी बरसेगी बन गोला/आकर्षण से मार कांच का दिल है भामा

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- अन्य

( मुक्त छंद)

नायक" दाढ़ी मुडा कर, मूँछ घोटना आप|
निश्चय ही बड़ जाएगी, इज्जत रूपी माप ||
इज्जत रूपी माप बढ़ायी श्रीराम ने|
मूँछ कबहुँ न रखी,दिव्य शिव-हनूमान ने ||
कह "नायक" कविराय, मूँछ तज बन अति भोला|
बाल चुभे तो पत्नी बरसेगी बन गोला||

इसीलिए मूँछें तजीं ,आप व्यर्थ हैरान |
लेखक से कवि बन गया,मेरे दिल का ज्ञान||
मेरे दिल का ज्ञान, हुआ आधा, पुनि आधा|
किंतु गृहस्थी की गाड़ी में नहिं है बाधा||
कह "नायक" कविराय, फाड मत स्वयं पजामा |
आकर्षण से मार, कांच का दिल है भामा ||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

-दिव्य=प्रकाशमान्
-शिव =महादेव (अष्टमूर्ति के अंतर्गत यह सोम-मूर्ति
तथा ब्रह्मस्वरूप हैं)
-भोला=सीदा-सादा
-भामा=स्त्री(पत्नी)
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जनपद के समस्त अधिकारी बंधुओ, साहित्यपीडिया सहित अन्य समस्त साहित्यकारों, ,पत्रकारों एवं समस्त पाठक बंधुओ को पावन पर्व होली की अनंत हार्दिक शुभकामनाएं|
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Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
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