बाय बाय 2016

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

कैसे सोलह शुरू हुआ था ,जिसका आज आखरी दिन है ।
नमन हमारा आप सभी को , साल का देखो अंतिम दिन है ॥
पहले माफ़ी हाथ जोड़ कर ,गर कोई भूल हुई हो हमसे ।
आपका दिल तो बहुत बड़ा है ,और फ़िर आप बड़े है हमसे ॥
करूँ शुक्रिया उन लोगों का , जो नफरत करते है हमसे ।
मज़बूती का कारण वो है , हर उलझन तब सुलझी हमसे ॥
धन्यवाद उनको भी कहना , प्यार किया जिसने भी हमसे ।
क्योंकि उनके प्यार कि खातिर , जीते है हम हर जंग सबसे ॥
प्रार्थना करनी है अब रब से , जीवन मेरा देन है उसकी ।
सुख दुख देन उसी कि तो है , उसको प्यारे है हम सबसे ॥

विजय बिज़नोरी

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विजय कुमार अग्रवाल
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मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।
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