*** बादल भी कभी माना है *****

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- अन्य

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कब तलक बरसने का इंतजार करते रहे तुम
आज तुम ही कहते हो बस करो अब और नही
क्या बादल भी कभी माना है मनाने से
नहीं बरसा तो नहीं जब बरसा तो हाय तौबा
कैसी मुहब्बत है तुम्हारी स्वार्थ से भरी यारी
तौबा इन इश्क वालों से कर लो ये कभी
अपने ना हुए तो यारों के क्या होंगे ।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

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