बात बेबात ही ललकार की बातें करना

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

बात बेबात ही ललकार की बातें करना
क्यों तुझे भाये है तलवार की बातें करना

उनको भाता नहीं परिवार की बातें करना
मुझको आता नहीं बेकार की बातें करना

गालियां बकते हैं रातों में शराबें पीकर
उनसे दिन में भी नहीं प्यार की बातें करना

संस्कारों की अलिफ़-बे नहीं सीखी जिसने
इल्तज़ा है न उस मक्कार की बातें करना

लाख हो जाए खफ़ा मुझसे जमाना बेशक़
मैं न छोडूंगी मगर यार की बातें करना

आज उद्योग ये संदिग्ध नज़र आते हैं
छोड़िये-छोड़िये अखबार की बातें करना

मेरा पैग़ाम मुहब्बत है " कँवल " कहती है
दोस्तो ! मुझसे न तक़रार की बातें करना

Views 63
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बबीता अग्रवाल #कँवल
Posts 51
Total Views 3.6k
जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia