बाढ का कहर

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

किया बाढ ने देश मे,…….ऐसा बंटाधार !
कितनो के टूटे हृदय,कितनो का घर बार !!

कहे कहानी बेरहम, बर्बादी की बाढ़ !
आया है फिर देश मे, संकट बड़ा प्रगाढ़!!

चीख चीख बस चीख है, शोर शोर बस शोर !
कुदरत के आगे कहाँ , चला किसी का जोर !!

मुश्किल में बस चीखिये ,… खूब कीजिये शोर !
रुष्ट प्रकृति पर कब चले, किसी मनुज का जोर !!
रमेश शर्मा

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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