बहुत याद आते हैं वो दिन

S Kumar

रचनाकार- S Kumar

विधा- कविता

एक लड़की पर उसके प्रेमी ने तेजाब फेकां ।
कुछ महीनों बाद लड़की ने उस लड़के को एक पत्र लिखा, कुछ इस तरह….

बहुत याद आते है अब वो दिन,
जब हम और तुम एक साथ थे ।
क्या भूल गये हो या याद है तुमको,
जब हम एक दुसरे की जान थे ।
बहुत याद आते है अब वो दिन,
जब हम और तुम एक साथ थे ।

क्या तुमको याद है की कैसे,
और कितने प्यार से हुई थी हमारी दोस्ती ।
मेरी दोस्ती और तुम्हारे प्यार में,
छिपे हुए हमारे लाखों अरमान थे ।
बहुत याद आते है अब वो दिन,
जब हम और तुम एक साथ थे ।

एक सवाल है मेरे मन में आज,
की क्या सोच कर तुमने किया ऐसा ।
क्यों और किस बात की दी ये सजा,
दोस्त कहलाने वाले, क्यों तुम बने हैवान थे ।
बहुत याद आते है अब वो दिन,
जब हम और तुम एक साथ थे ।

जाओ मैंने फिर भी माफ़ किया तुमको,
शायद तुम्हारे लिए यही तो यही प्यार था ।
जबाब नहीं होगा तुम्हारे पास कोई,
क्या नज़रे मिला पा रहे हो अपने आप से ।
बहुत याद आते है अब वो दिन,
जब हम और तुम एक साथ थे।

मैं जिस हाल में हूँ, उसी हाल में रह लुंगी,
तुम्हारे दिए दर्द को, उमर भर सह लुंगी ।
तुम अपनी इस हरकत को एक दिन जाओगे भूल,
पर मेरी यादों पर ना पड़ेगी, कभी वक़्त की धुल ।
दुआ है मेरी तुम अपनी जिन्दगी में खुश रहना,
मेरा कभी जिक्र हो, तो कभी कुछ न कहना ।
कल को तुम्हारा भी एक परिवार होगा,
एक बेटा और एक बेटी का साथ होगा ।
तो तुम बस दुआ करना, की तुम्हारी बेटी को,
कभी तुम्हारे जैसा कोई और ना मिले,
और तुम्हारा बेटा, कभी तुमसा ना बने ।
तुम्हारा बेटा, कभी तुमसा ना बने ।
कभी तुमसा ना बने ।

© Kumar
8813000781

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S Kumar
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मैं वो लिखता हूँ, जो मैं महसूश करता हूँ, जो देखता हूँ, कभी कभी अपने ही शब्दों में खुद को ढूंढ़ता हूँ, हर बार कुछ बेहतर की कोशिश करता हूँ, बस कुछ ऐसा ही हूँ मैं, ठहरता नहीं हूँ, मैं चलता रहता हूँ ।। कुमार हरियाणा की माटी से जुड़ा एक कलाकार लिखने के साथ साथ अभिनय और निर्देशन में भी रूचि है ।

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