होठों पर कभी अंगार

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

मायूसी का मत रखना ,
होठों पर कभी अंगार ,

जल जाएगी खुशियां सारी ,
मन पर दुखों का होगा ,

बहुत बड़ा सम्राज्य ,
बाहें फैलाकर आगोश में ,

ले लेगा विकार ,
वंचित तू रह जाएगा,

अपने ही अधिकारों से,
रुखसार अपना धोएगा,

तू बहती अश्रु धारो से,
पल पल निज मन में मरेगा ,

फकत दुखो का पीछा करेगा ,
हासिल कुछ होगा नहीं,

दिन रैन तू बेचैन रहेगा ,
मायूसी से नाता तोड़ो ,

मुस्कान का अधरो से ,
प्यार भरा इक नाता जोड़ो,,

©® रीता यादव

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