बहन विरासत है

Ashutosh Jadaun

रचनाकार- Ashutosh Jadaun

विधा- लेख

महज बहन नही हो तुम ,मेरे सपनों की आवाज हो ,मेरे सुनहरे भविष्य का आगाज हो, घर के आंगन की तुलसी हो , माना कि
एक दिन घर छोड़ साजन के घर जाओगी ,
पर माटी मे महक तुम्हारी रहेगी सदा,
ये बात भूलना नही । घर की असल विरासत तो तुम हो और घर के कण कण मे रची और बसी होती हो सुनहरी यादों के रूप मे
भाई तो केवल घर मे दीवार जैसे होते है
जिस पर टिकी संस्कारो की छत ही उसे पहचान देती है वरना सिवाय ईट मिट्टी और गारे के दीवार कुछ नही ।

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Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है II

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