बहन बेटियों की लाज बचाइए

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

मां फिर से अपने हाथों में कटार उठाइए l
लूट रही बहन बेटियों की लाज बचाइए l
मधु ,कैटभ हुए बहुत ,अब हजारों महिषासुर –
आकर शेर की सवारी पर इनको संघारिए l

तड़प तड़प कर मर रही है आप की बेटियां l
कलयुग छू रहा है ,अब पापों की चोटियां l
आकर मां इन पापियों से निजात दिलाइए-
इस दुराचार से है अब त्रस्त आप की दुनियां l

हर एक बालिका में अपना ही रूप दिखाइए l
सो रही उसकी अंदर की काली को जगाइए l
लड़ सके शत्रु से कर सके खुद की सुरक्षा-
शक्ति ऐसी दीजिए और साहस बढ़ाइए l

मां फिर से अपने हाथों में कटार उठाइए l
लूट रही बहन बेटियों की लाज बचाइए l

रीता यादव

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