बस तेरी अब याद है…..

प्रतापसिंह ठाकुर

रचनाकार- प्रतापसिंह ठाकुर

विधा- गज़ल/गीतिका

बस तेरी अब याद है…
तर्ज़:-(चुपके-2 रात दिन)

(1) प्रियतम प्यारे मोहना बस तेरी अब याद है..
वो तेरा अक्रूर संग मथुरा को जाना याद है।
प्रियतम प्यारे…
(2) देख लेना हाल क्या है अब तेरे जाने के बाद..
मीन हो गयी नीर बिन नीर की फरियाद है
प्रियतम…
(3) फोड़ देना वो तेरा गगरी को कंकर मार के..
वो ग्वालों संग तेरा माखन लुटाना याद है।
प्रियतम…
(4) भर गयी है यमुना सारी आसुओं के नीर से..
वो यमुना जल नहीं नयनो की अश्रुधार है।
प्रियतम…
(5)छोड़ा है हमको अकेला किस भरोसे अब यहाँ..
जान भी जायेगी नहीं तेरी वापसी की याद है।
प्रियतम…
(6) चोरी-चोरी तुमसे मिलने आती थी हम दौड़कर..
वो तेरा अधरों पे रख बंशी बजाना याद है।
प्रियतम…
(7)घर -पति -सुत छोड़कर वो पूर्णिमा की रात में..
वो तेरा हम सब के संग रास रचाना याद है।
प्रियतम…
(8)मिलते थे हम जिस जिस जगह मेरे प्यारे रात दिन…
मधुवन ,निधिवन ,यमुना पुलिन वो हर ठिकाना याद है।
प्रियतम….
(9) मुद्दते गुजरी है कान्हा तुम न आये अब तलक..
वो तेरा भेजासंदेशा उद्धव के द्वारा याद है।
प्रियतम…
(10)क्यों न लेते सुध हमारी तुमको आती क्या न याद..
मोर मुकुट पीताम्बर वसन वो प्यारी चितवन याद है।
प्रियतम…
(11)छोड़ना था यूँ अकेला फिर ये हमसे मेल क्यूँ..
अपने अधरों का रस पिला लब को सुखाना याद है।
प्रियतम…
(12)बात आई अब समझ में पहले समझी थी नहीं..
छोड़ा माँ बाबा को तुमने हमको छोड़े क्या बात है।
प्रियतम…
(13) ले गये सब कुछ हमारा कुछ ना गए तुम छोड़कर..
बस यहाँ पर तन हमारा मन तुम्हारे पास है।
प्रियतम…
(14)तुम करो या ना करो हमको तुमसे प्यार है..
वो तेरा बाँकी अदा से दिल को चुराना याद है।
प्रियतम….

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