बस तुम्हारे लिए !

Anurag Dixit

रचनाकार- Anurag Dixit

विधा- कविता

बस तुम्हारे लिए !

बस तुम्हारे लिए,
फूल खिलता है क्यों,
दिन निकलता है क्यों,
रात ढलती है क्यों,
यों तमन्ना किसी की मचलती है क्यों,
बस तुम्हारे लिए !
पर्वतों की छटा, बादलों की घटा,
मौसमों की हवा रुख बदलती है क्यों
क्यों बना ये गगन,चाँद तारे सघन,
पपीहा ये पिहु -पिहु सुनाता है क्यों
बस तुम्हारे लिए !
प्रीत पलती है क्यों
श्वांस चलती है क्यों
क्यों है दिल में चुभन
क्यों लगी है लगन
बस तुम्हारे लिए !
क्यों बनी दूरियां,
क्यों हैं नज़दीकियां
क्यों दवी सी जुवां पे कोई बात है,
क्यों ये ज़ज्बात हैं,
बस तुम्हारे लिए !

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Anurag Dixit
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मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं अभिव्यंजना साहित्यिक संस्था की आजीवन सदस्य्ता आपके सहयोग एवं सुझाव का आकांक्षी ! अनुराग दीक्षित

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