बसन्त के फूल

रकमिश सुल्तानपुरी

रचनाकार- रकमिश सुल्तानपुरी

विधा- दोहे

फूल।पुष्प।प्रसून ।

सरसों उमड़ी खेत में, ,,,खिले बसन्ती फूल ।
तेरे मेरे प्यार का,,,,,,,,,,,, मौसम है अनुकूल ।।

परसो पनपे पात संग,,,,,, पावन पुष्प प्रसून ।
पुलकित हो प्रभात में , कम हो गया जुनून ।

सुख दुख कांटे फूल है ,कभी धूप सा छाव ।
बनी रहे समरूपता,, मरहम हो या घाव ।।

राम केश मिश्र

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रकमिश सुल्तानपुरी
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रकमिश सुल्तानपुरी मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल लेखन के साथ साथ कविता , गीत ,नवगीत देशभक्ति गीत, फिल्मी गीत ,भोजपुरी गीत , दोहे हाइकू, पिरामिड ,कुण्डलिया,आदि पद्य की लगभग समस्त विधाएँ लिखता रहा हूं । FB-- https ://m.facebook.com/mishraramkesh मेरा ब्लॉग-gajalsahil@blogspot.com Email-ramkeshmishra@gmail.com Mob--9125562266 धन्यवाद ।।

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