बरसे बरसे बरखा बरसे

MANINDER singh

रचनाकार- MANINDER singh

विधा- गज़ल/गीतिका

बरसे बरसे बरखा बरसे,
पिया मिलन को जिया तरसे,

घनघोर बदरिया छायी रे,
जले बदन बरखा के जल से,

पुरज़ोर बिजुरिया भी है चमके,
सावन संग मेरे नैना भी बरसें,

कहीं कोई कोयलिया कु कु कूके,
चिढ़ होवे मुझे बहती सर्द हवा से,

छोड़ “मनी” सेवाई तू आजा रे,
संग तेरे झूमने को है मन तरसे,
तू आजा रे….

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MANINDER singh
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मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया में....... cont no-9780533851
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