बन विवेक-आनंद,कह रहा संवत्सर नव

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

नव संवत्सर पर बनो, आप ज्ञानमय प्राण|
तब ही राष्ट्र प्रसन्न जब, सब का हो कल्याण||
सबका हो कल्याण, जाग,कुछ पाना सीखो|
तजकर मन का मैल, मुस्कराना भी सीखो||
कह "नायक" कविराय,कुछ नहीं दिखे असंभव|
बन विवेक-आनंद, कह रहा संवत्सर नव||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

प्राण=जीवन,शक्ति

आपको भारतीय नव वर्ष,विक्रम संवत 2074 एवं नव रात्रि की अनंत हार्दिक शुभकामनाएं |

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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