बन विवेक-आनंद,कह रहा संवत्सर नव

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

नव संवत्सर पर बनो, आप ज्ञानमय प्राण|
तब ही राष्ट्र प्रसन्न जब, सब का हो कल्याण||
सबका हो कल्याण, जाग,कुछ पाना सीखो|
तजकर मन का मैल, मुस्कराना भी सीखो||
कह "नायक" कविराय,कुछ नहीं दिखे असंभव|
बन विवेक-आनंद, कह रहा संवत्सर नव||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

प्राण=जीवन,शक्ति

आपको भारतीय नव वर्ष,विक्रम संवत 2074 एवं नव रात्रि की अनंत हार्दिक शुभकामनाएं |

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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