** बन न जाए दास्ताँ **

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

जब रूह को रूह से होगा वास्ता ,
खुद ब खुद बन जाएगा रास्ता ।
अजनबी भी बन जाएगा अपना ,
शुरू हो जाएगी हसीन दास्ताँ ।।

तेरा मुझ से है जरूर कोई वास्ता ,
तभी तो मिलता है तेरा मेरा रास्ता ।
टकरा गए जो किसी मोड़ पर हम ,
बन न जाए तेरी मेरी दास्ताँ ।।

जाने कब तेरा मेरा पड़ जाए वास्ता ,
बन जाए दिल का दिल से रास्ता ।
भले ही आज अजनबी हैं हम ,
कौन जाने कब बन जाए दास्ताँ ।।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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