बन जाओ कोयल

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

कोयल मीठा बोल कर,प्राप्त करे सम्मान|
हर्षित कर जन-हृदय को, बन गई मृदुल-महान||
बन गई मृदुल- महान , कुरस बाणीमय कौवा|
सहे नित्य दुत्कार,बन गया जग- भ्रम-हौवा||
कह "नायक" कविराय प्रेम बिन दृग कर बोझल|
जियो न, तजो विकार, और बन जाओ कोयल||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

Sponsored
Views 75
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बृजेश कुमार नायक
Posts 137
Total Views 35.2k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia