बन के मजदूर बचपन निकलता रहा

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

बन के मजदूर बचपन निकलता रहा
खेलने के लिए वो तरसता रहा

चाहिए थी कलम पर मिली चाकरी
बोझ बचपन उठा के सिसकता रहा

रूप वैसे तो बच्चा है भगवान का
पर गरीबी में भूखा तड़पता रहा

धन गरीबों को कागज़ पे मिलता बहुत
पर तिजोरी में नेता की भरता रहा

बाल अपराध भी इतने अब बढ़ गए
'अर्चना' देख दिल बस दहलता रहा

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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